दास्तान
By Jyoti Prakash Mohanty
आज अपनी दास्तान सुनाने नहीं
तेरी कहानी सुनने आया हूँ
जो किसी को ना सुनाया हो
वो तेरी ज़ुबानी सुनने आया हूँ ..।
कुछ शिकायतें..कई सारी शिकवे
जो बता ना पाये उन आँखों ने
उनसे रूबरू होने आया हूँ ..।
दो बूँद सजल मोती
जो पलकों को चुभते रह गये
उन्हें हथेली में समेटने आया हूँ ..!
कुछ हल्की सी मुस्कुराहट
जिन्हें घने कोहरे ने छुपाके रखा
उन्हीं से ख़ुद को गुदगुदाने आया हूँ ..!
आज अपनी दास्तान सुनाने नहीं
बस तेरी कहानी सुनने आया हूँ …!
By Jyoti Prakash Mohanty

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