दस्तक
By Shivani Singh
राजीव नौकरी से जल्दी रिटायरमेंट ले कर हिमांचल के एक छोटे से शेहर में एक छोटा सा कमरा लिया था। एक बैडरूम, एक किचन और बाथरूम का घर बेहद ही ख़ूबसूरत जगह पर स्तिथ था। बालकनी के दरवाजे कांच के थे, पीछे पेड़, पहाड़ और एक पतला सा रास्ता घर के पिछले हिस्से से यूँ जुड़ा था की कोई भी आराम से पिछले रस्ते से भी आ सकता था । हरियाली के बीच खुले आसमान के नीचे रहने का सपना था राजीव का। कई दिन बड़ी ही शांति और आराम से व्यतीत हुए। आस पास घूमने के लिए बहुत प्यारी जगह थी।
पास का झरना बेहद ही सुन्दर था। बगल के पत्थर पर बैठ कर राजीव पानी के छीटें से मन्न को भिगोते हुए हुए किताब पढ़ रहा था। पढ़ते पढ़ते किताब से नज़र उठि तोह निगाहे एक औरत पर गयी जो देखने में बेहद खूबसूरत थी। उसने राजीव को देखते हुए देखा। यूँ तोह ऐसे निगाहे की वह अदि थी परन्तु इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया करती थी। लेकिन इन् आँखों की कशिश ने उसे मोह लिया था।
राजीव अपने दिनों में लड़कियों में बेहद चर्चित रहा करता था और उम्र के साथ उसकी प्रतिभा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आयी थी। सामने मुस्कुराते हुई लड़की इस बात का सबूत थी। राजीव उठकर उसके पास गया, उसको आता देख नीलम अपनी सहेलियों के साथ व्यस्त हो गयी पर उसके दिल की धड़कन उसके बढ़ते क़दमों के साथ बढ़ रही थी। अपने पति को एक कार दुर्घटना में खो देने के बाद अज्ज पहली बार उसके मैं में नए एहसास जगे थे। हिम्मत जुटाकर मुड़ी तोह उसे पीछे खड़ा देखा। उसकी मनचली सी बातें और उसका खुद का अकेलापन नीलम को प्रोत्साहित कर रहा था।
रात को सोते वक्त बालकनी के दरवाजे पर राजीव को खटखहत का एहसास हुआ, वह यह सोच कर वापस सो गया की हवा से कोई टहनी टकरा रही होगी। अगले दिन नीलम से मिलकर उससे बेहद आनंद मिला। उसने सोचा था की यहाँ उसको सुकून मिलेगा पर सुकून को बाटने वाला भी मिल जायेगा, यह उम्मीद नहीं थी।
उस रात फिर से पीछे के दरवाजे पर खटखहत में एक तत्कालिता का भाव था। राजीव उठकर देखने गया, तोह देखा बहार कोई नहीं था। उसे लगा कोई शरारत कर रहा होगा और वापस जाकर सो गया।
वह नीलम के साथ अब बहुत समाय व्यतीत करने लगा था, दोनों बेहद नजदीक आ गए थे। अब तक दूसरे के घर आना जाना भी शुरू हो गया था। दोनों के बीच की दूरिया ख़त्म सी हो चुकी थी।
एक रात नीलम और राजीव साथ में थे तभी नीलम ने खटखटाहट सुनी। उसने राजीव को उठाने की कोशिश की पर वोह नहीं उठा। चादर बदन पर लपेटे हुए वह देखने के लिए उठी तोह एक औरत की परछाई दरवाजे पर दिखाई दे रही थी। बारिश में भीगती हुई लड़की दरवाजे को जोर जोरसे खटखटा रही थी। बिजली कड़की और नीलम ने उसका चेहरा देखा। दो पल की झलक ने हक्का-बक्का कर दिया लड़की ने लाल सडी पेहन रखी थी, उसके बाल खुले हुए थे और चेहरे का रंग उतरा हुआ था। उसके हाथो पर रस्सी से बंधे होने के निशान थे और होठ कटे हुए थे , पर उसको आँखों में बेचैनी थी। मनो उससे कुछ कहना चाह रही हो। नीलम स्तब्ध कड़ी रही जब पीछे से किसी ने उसके कंधे पे हाथ रखा। वह चौंक गयी और पीछे मुड़कर देखा तोह राजीव था। वापस जाते हुए दरवाजे की तरफ देखा तो वहां कोई नहीं था। वह रात भर सो नहीं पायी पर उसने राजीव से कुछ नहीं बताया। अगले एक हफ्ते वह राजीव से नहीं मिली। राजीव इस बात से परेशान अपने कमरे में बैठे फ़ोन मिलाये जा रहा था की तभी उसे हॉल में से चीखने की आवाज़ सुनाई दी, वह चुप चाप बैठा रहा। उसके चेहरे का रंग उड़ चूका था।
करीब दो हफ्ते बाद नीलम उससे मिलने आयी और उस रात के बुरे सपने का मंज़र उसने अपने अंदर दबा लिया था। काफी देर बात चित करने के बाद राजीव ने उसे एक तौहफा दिया - " एक लाल साड़ी " नीलम के मन में एक झिझक थी पर उस लड़की का चेहरा भी उसकी आँखों के सामने से गुजर रहा था। राजीव के बहुत कहने पर उसका मन रखने के लिए वह लाल सड़ी पहनकर आई। उस लड़की की तस्वीर को नज़रो से हटाने के लिए ग्लास में बची हुई शराब उसने एक घूंट में पि ली।
इसके आगे उसकी यादों में वह पन्ना जुड़ने जा रहा था जो सदा खौफ्फ़ और चैन देता रहेगा। उसकी आंखें खुली तोह उसने खुद को रस्सी से बिस्तर पर बंधा पाया। राजीव सामने खड़ा उसे एक हलाल होने वाले बकरे की तरह देख की तरह देख रहा था। हालाँकि एक कसाई की आँखों में भी दया होती है पर परन्तु इन् आँखों में पागलपन दिख रहा था
वह उसकी तरह बढ़ने लगा, नीलाम को लग रहा था मानो उसका दिल सीने से बहार आ जायेगा और यह कहीं बेहतर होता, उससे जो होने वाला था। तभी अचानक पछले दरवजए से खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ी। फिर लगा मनो कई लोग एक साथ खट -खटा रहे हो। दरवाजे की तरफ देखा तोह कई सारि औरते लाल सड़ी में खटखटा रही थी। उनकी खटकाहट की कम्पन से दरवाजा टूट गया और वह सारी औरते राजीव की तरफ बढ़ने लगी। नीलम किसी तरह रस्सी छुड़ाकर भागी। आगे क्या हुआ उसने नहीं देखा।
अगले दिन पुलिस को राजीव की लाश मिली। उसने पंखे से लटकर अपनी जान दे दी थी। बाद में यह पता चला की वह सीरियल किलर था, जो औरतों को लाल साडी पहनाकर उनको प्रताड़ित किया करता था जब तक वह मर नहीं जाती थी। और अब तक उसने पच्चीस औरतों को मारा था।
By Shivani Singh

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