थोड़ा रुमानी हो जाए
By Sunil Kumar Shukla
सोचता हूँ ज़वाब दे ही दूँ ।
ख़त में उनको गुलाब दे ही दूँ ।।
जाने कब से वो प्यासे बैठे हैं ।
आज उनको शराब दे ही दूँ ।।
उनको सोने पे डर सताता है ।
एक प्यारा सा ख़्वाब दे ही दूँ ।।
उनको ख़्वाहिश है रोशनी की बहुत ।
चलो एक माहताब दे ही दूँ ।।
शौक़ उनका कि सुर्ख़ियों में रहें ।
क्यों ना उनको ख़िताब दे ही दूँ ।।
उनकी ख़ातिर लिखे जो अफ़साने ।
आज पूरी क़िताब दे ही दूँ ।।
रोज़ चिलमन से वो लुभाते हैं ।
क्यों ना उनको नक़ाब दे ही दूँ ।।
सोचता हूँ ज़वाब दे ही दूँ ।
ख़त में उनको गुलाब दे ही दूँ ।।
©सुनील
By Sunil Kumar Shukla

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