तेज़ाब
Updated: Jul 21, 2025
By Dr. Amit Prakash

तेज़ाब मुँह पर फेंके जाने के बाद, आईने को सम्बोधित करती निर्भया…
मेरे निश्चय-अंगारों को,
तेज़ाब कहाँ बुझा पाया ?
मैं सुन्दर थी;
मैं सुन्दर हूँ;
ये उनकी ही है कायरता,
जो आईना नहीं छुपा पाया;
के तेज़ाब मेरे लहु से सना,
कायरों का गहना बना,
सम्मति, प्रेम, को फ़ूँक दिया,
पर मुझको नहीं झुका पाया;
ये उनकी ही है कायरता,
जो आईना नहीं छुपा पाया,
मैं सुन्दर थी ;
मैं सुन्दर हूँ ;
उजालों ने मुँह मोड़ लिया पर,
परछाई नहीं चुरा पाया,
मुझको नहीं झुका पाया,
सम्मान नहीं मिटा पाया…||
By Dr. Amit Prakash

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