तेरे लिए
By Kavya Mehulkumar Mehta
एक-एक शिकायत रखी मैंने पास,
पास रखे मैंने अपने ख़्वाब,
पास रखे मैंने अफ़सोस,
पास रखी मैंने कई अरदास।
तेरे लिए तो सब रखा मैंने,
दुनिया की नज़र से मैं ख़ाफ़।
क्यों न तू आया?
तेरे ही लिए तो मैं
चाँद से भी नूर ले आई,
तेरे ही लिए तो मैं
फिरूँ यूँ भागी-भागी,
तेरे ही लिए तो मैं
लिखूँ यह कहानी।
By Kavya Mehulkumar Mehta

Nice rhyming and beautifully written
बहुत खूब
Excellent
She's a star