तेरी याद (Teri Yaad)
Updated: May 30, 2023
By Sameer Agarwal
अपने जख्मों पर मरहम लगाने ही बैठा था,
जब देखे ये जख्म खराब, मुझे तेरी याद आई।
न जाने क्यों इन्हें और भी मैं कुरेदता रहा,
जब लहू को बहते देखा बेहिसाब, मुझे तेरी याद आई।
मेरी इन निगाहों के मौसम तो भीगे ही रहते हैं,
पर गिरा जब भी यादों की बिजलियों का सैलाब, मुझे तेरी याद आई।
हसीं चेहरों को गौर से यहां देखा है मैंने जानम,
पर जब भी हुई है नियत खराब, मुझे तेरी याद आई।
दिल दिया है मैंने फिर से तेरे रुखसारों को,
पर जब मिली बेवफाई मेमसाब, मुझे तेरी याद आई।
एक उम्र बिता दी मयखाने में तुझे भूलने की खातिर,
पर जब भी पी है मैंने शराब, मुझे तेरी याद आई।
तुझसे बिछड़ कर मैंने बस इतना सा समझ ले,
जब भी खोली है अपने दिल की किताब, मुझे तेरी याद आई।
By Sameer Agarwal

Comments