तू स्वयं से संग्राम कर
By Surabhi Raj
कोशिशें तूने हज़ार कर ली
पर जो निराशा छाई है
तोड़ने तुझे रोकने तुझे
तेरी शत्रु बनकर मंडराई है
तू स्वयं से संग्राम कर
अपनी निर्बलताओं पे प्रहार कर
आंधीयों से जूझ जा तू बिजली बन वार कर
समय है कठोर तेरा धैर्यता से विचार कर
तू स्वयं से संग्राम कर
विधाता को पूज पर हर बार तू माँग मात
भाग्या की सोच मत अपने कर्म पर विश्वास कर
ब्रह्मा सा बन, तू स्वयं अपना निर्माण कर
तू स्वयं से संग्राम कर
जो तेरे अंदर है छुपा उस दानव पर प्रहार कर
दुर्बलताओं को जान उनको शक्ति से परास्त कर
तुझमे है शक्ति तू स्वयं की पहचान कर
तू स्वयं से संग्राम कर
By Surabhi Raj

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