तू चाहिए!
By Saksham Raj
तेरी हां हो यही तो एक अर्ज़ी चाहिए
इश्क में मुझे बस तेरी मर्ज़ी चाहिए ।
तू भी अब हो जाए मेरा जैसे मैं तेरा हूं हमेशा,
तुझे मेरी ज़रूरत हो ऐसी ग़र्ज़ी चाहिए ।
तू मेरे बालों को सहलाया करे मुझे बहलाया करे,
ज़िंदगी में ऐसी ही जन्नत-ए-अर्ज़ी चाहिए ।
आरज़ुओं को पूरा करने का दाम बताओ मुझे,
के मुझे नहीं कुछ भी यूं ही फ़र्ज़ी चाहिए ।
जो न हो मेरे मंसूबे पूरे तो कोई बात नहीं 'काबिल',
तन्हा रह सकूं फिर ऐसी खुदगर्ज़ी चाहिए I
By Saksham Raj

Beautifully written ✍🏻❤️✨
Excellent 👌🏻
Beautifully written ❤️
Your rhythm feels natural, like the poem knows exactly where it wants to go.