तू कौन ? मैं कौन ..? ( रक्षाबंधन )
By Aryawardhan Garg ( kajal )
नदियों का उफान सहीं मैं बारिश की पहली बूंद है तू
मै हसता तो हंसती तू भी , रूठा तो रूठी तूफान है तू
फसलों की बहार सहीं मै, रिम झीम बारिश फुहार है तू
हरी भरी हाथों की खुशि मैं कंगन की झंकार है तू
सूखे तालाब की प्यास सहीं मै खुशियों की बरसात है तू
तेरा छाया ढाल सहीं मैं , हरदम हाथों में पास है तू
सब कामों में गुड़ गोबर हो जाऊं तो , अंतिम मेरी विश्वास है तू
मै कौन हूं ?
हर पल तेरा स्वांस रहूं मैं
आंखों में विश्वास रहूं मैं
गालों पर गुड़ हड़ बन जाऊं
हाथों में अरदास रहूं मैं
कभी पायल में छम छम करता
कभी कंगन में खन खन करता
रूठ गई मुझसे तू तो बहलाने को
पल पल करता हर पल करता ,
अलंकार अनुप्रास रहूं मैं ।।
By Aryawardhan Garg ( kajal )

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