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तू उसका कर्ज चुकाता जा

By Ankita Nishad


रास्ते, मंजिलें सब मनुष्य ने ही बनाए हैं,

कसमे, वादें सब इसकी ही धाराएँ हैं,

जीवन, मरन सब इसी में समाए हैं,

तू परमात्मा की इस विरासत को अमर बनाता जा,

दूसरों की छोड़ तू अपना फर्ज निभाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।



जिस राह पर तू चल रहा है वहाँ फुलों से ज्यादा काँटे मिलेंगे,

अपनों की गैरत से ज्यादा तन्हाइयों के सन्नाटे मिलेंगें,

खुशी के नजरानो से ज्यादा दुखों के तमाचे मिलेंगे,

तू हर उस तमाचे को जिंदगी की एक सीख बनाता जा,

अपने लहू से हर उस काँटे की शान बढ़ाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।


राह में मुसिबतें तो आएँगी पर अपनो की आड़ लेके,

जिंदगी चालें तो चलेगी लेकिन सपनो को ढाल बनाके,

तेरा ये मन ही साथ छोड़ देगा तुझे कंगाल बनाके,

"ये मन तेरा लक्ष्य नहीं" ये सोच तू उसपर अपनी धाक जमाता जा,

जिंदगी की हर उस चाल को उसकी औकात दिखाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।


मंजिल को तेरे कदम चूमने ही है ये तो किस्मत का लिखा है,

इम्तिहान तो यहाँ तेरी लगन, तेरे कडे परिश्रम का है,

इतिहास गवाह है जो इनसे टकराया वह मुँह के बल गिरा है,

तू कुदरत की इस देन को अपना ईमान बनाता जा,

अपनी शालीनता से इन सब का सम्मान बढ़ाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।


याद रख तेरी ये हस्ती तेरे माता-पिता तेरे देश की देन है,

जिनकी एक मुस्कुराहट ही तेरे असीम जोश का केंद्र है,

तेरा ये अटूट इरादा तेरे आत्मविश्वास तेरे आत्मसम्मान की देन है,

तू इन जज्बों पर जमीं धूल को अपने माथे का तिलक बनाता जा,

इन सब की आन की खातीर तू अपनी खुशियों की बली चढ़ाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।


अपने उन माता पिता को तू गर्व के आँसू रुलाता जा,

अपने हौसले से तू इस देश की तकदीर बनाता जा,

अपने इस विश्वास से तू दुनिया को सीख सिखाता जा,

अपना श्रध्दा रूपी लहू तू भारत माँ को चढ़ाता जा,

अपने मजबूत इरादों से धरती का बोझ उठाता जा,

इन्सान है तू कुछ तो इन्सानियत दिखाता जा,

दूसरों की छोड़ तू अपना फर्ज निभाता जा,

जिस माटी में जन्म लिया है तू उसका कर्ज चुकाता जा।


By Ankita Nishad


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