तुम्हें याद है ?
By Sarthak Shankar Chaturvedi
तुम्हें याद है ?
कभी तुम्हारे नाम से जो काग़ज़ रोशन होते थे,
अब वहीं पन्ने बस स्याही का ख़ून रोते है।
कुछ अल्फ़ाज़ थे, जिनमें मेरी धड़कनें बसती थीं।
अब वो ख़ामोशी ओढ़कर तेरा पता पूछते है।
कभी सोचा था कि तुझसे कह दूँ,
कि मेरी ख़ामोशी तेरे नाम का कलाम है,
मगर हर्फ़ लरज़ते रहे…
लब ख़ामोश रहे…
और मैं तेरी परछाई को ही आशना समझता रहा।
फिर इक दिन…
तेरे कंधे पर किसी और का सर देखा,
और मेरी आँखों ने सारी दुआएँ छोड़ दीं।
तेरे हाथों में किसी और की उंगलियाँ थमीं,
और मेरा वजूद, जिंदा रहकर भी मर गया।
अब जब भी तेरे शहर आता हूँ,
तेरी गलियों से कतराकर गुज़रता हूँ,
कहीं कोई ख़्वाब तेरा चेहरा पहनकर
फिर से मेरी आँखों में बस न जाए।
By Sarthak Shankar Chaturvedi

👏
Amazing 👏
awesome bro
Ye to relatable hogya
✨✨