तुम्हारा होना
By Aaishpreet Bajaj
ये ज़ुल्फ़ें खुल जाएं अगर
या बिखर जाएं अगर हम,
तुम समेट दोगे क्या?
अकेले रहना नहीं आता मुझे
कभी रास्ते पर अकेले मिलजाऊं तो,
तुम साथ रहोगे क्या?
इलज़ाम लगें अगर मुझपर कभी
या शक बन जाऊँ दुनिया का,
तुम विश्वास करोगे क्या?
फ़रेब की बंदिशों में बंधी हूँ
उड़ने से घबरा जाऊँ अगर,
तुम आज़ाद कर दोगे क्या?
मुझे धोख़ा मिल चुका है पहले भी
डर लगता है यकीन करने से,
तुम यकीन बनोगे क्या?
खौफ़ रहता है मुझे दुनिया का
कभी अगर डर जाऊँ मै,
तुम संभल लोगे क्या?
दिल पर लगा लेती हूँ छोटी-छोटी बातों को
नाराज़ अगर होजाऊँ मै,
तुम मना लोगे क्या?
जाने को कहूँ अगर तुम्हे
या बदल जाऊँ अगर मै,
तुम पलट कर आओगे क्या?
अंधेरे में चमकने वाले चाँद की तरह
अगर बादलों में फीकी पड़ जाऊँ तो,
“तुम तब भी ईबादत करोगे क्या?”
By Aaishpreet Bajaj

👌👌
👍👍
❤️
Wow so good yaar
Kya baat hai!!