तुम लाजवाब खूबसूरत हो
By Miss. Swarupa Deepak Mule
मदहोश सी मुस्कान ; कुछ राज गहरे
इन्ही से सजते है ; तुम्हारे हसीन चेहरे
जो देखूँ आँखो में ; नादानी पहचान पाऊँ
पढूं जो नजरे तुम्हारी ; तन्हाई जान जाऊँ
आसूओं के लिए आखों में ; नहीं शायद जगह
कुछ अपने, कुछ औरों के ; सपने हो इसकी वजह
साँसों से ज्यादा शायद ; जिम्मेदारीयाँ साथ रखते हो
गालीयों से भरते हो बोली ; मगर जज्बात सिये रखते हो
जो रखूँ तुम्हारे कांधे पे सर ; सुकूँभरे सपने देखती हूँ
जो लिपटू तुम्हारे सिने से ; हर गम भूल जाती हूँ
मेरी कितनी सारी खुशियाँ ; तुम खुदसे जोडते हो
मेरा प्यार, मेरा गुस्सा ; हर जज्बात समझते हो
थामे हात तुम्हारा ; मै बिना डरे चलती हूँ
तुम्हारी जिंदगी में तुमसे ज्यादा ; शायद मै झलकती हूँ
पापा, भाई, दोस्त, हमसफर ; तुम्हारा अंश कोई भी हो
हर रूप, रंग, ढंग से ; तुम लाजवाब खूबसूरत हो
By Miss. Swarupa Deepak Mule

Nice Poetry
Nice Poetry
Nice..very good
Khup chhan लिहिले आहे
Nice Poetry