तुम मेरी कविता हो
By Rathod Aakash
तुम मेरी कविता हो
तुम मेरी कविता हो
जैसे राम की सीता हो
तुम प्यार का दर्पण हो
मेरे जन्मों का तर्पण हो
तुम श्रृंगार भू अंबर का
तुम टहराव जलंदर का
तुम लाली हो ललिता हो
तुम मेरी कविता हो।
तुम बिन पुष्प नहीं खिलते हैं
तुम बिन तारे रूठे लगते हैं
तुम आकाश जीवन का हो
तुम विश्वास मन का हो
तुम जैसा कोई तो दिखता हो
तुम मेरी कविता हो।
पथ का तुम आराम सा हो
सूर्य पर तुम विराम सा हो
तुम रोशनी चांद की हो
तुम चमक मेरी भी हो
तुम मेरी ह्रदय पुनीता हो
तुम मेरी कविता हो।
तुम मेरा आधार हो
सभी मेरे सुधार हो
तुम सांसों का अनुशासन भी
तुम नियमों का प्रशासन भी
तुम्ही से ध्यान मेरा भटकता हो
तुम मेरी कविता हो।
तुम यादों की गठरी हो
तुम गली प्रेम की संकरी हो
तुम करुण पुकार जीवनभर की
तुम आश जैसे गिरधर की
मुझ जैसा बस तुम्हे खोजता हो
तुम मेरी कविता हो।
सुविचार हो भावों का तुम
व्यवहार हो गांवों का तुम
तुम कच्चा रास्ता मेरे घर का
तुम उद्घोष प्रेम समर का
साथी तुम जैसा ही मिलता हो
तुम मेरी कविता हो।
इस जन्म तुमको लिख लूंगा
मन का गगन तुमको दूंगा
तुम मेरे हो कह देता हूं
इतना कह कर रह लेता हूं
मैं तट तुम सरिता हो
तुम मेरी कविता हो
By Rathod Aakash

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