तुम तो ऐसी नहीं थी
By Karan Bardia
तुम तो ऐसी नहीं थी,
तुम तो ग़ज़लें गाया करती थी,
दुखी बैठे हर इंसान को तुम तो हसाया करती थी,
तुम तो हर वक्त बस मुस्कुराया करती थी,
क्यों हो इतनी खोई खोई सी आज कल,
तुम तो हमेशा खुश रहा करती थी।
कुछ तो हो गया है तुम्हें
शायद किसी ने कुछ कह दिया है तुम्हें ,
वरना तुम तो हमशा बेधड़क और बेखौफ़ हुआ करती थी,
शायद किसी ने चुप करा दिया है तुम्हें।
तुम तो ज़ोर से हसा करती थी,
किसी के आते ही चुप होकर शर्माया करती थी,
कुछ तो बात थी तुम में जो कहीं छूट गई है,
क्योंकी तुम तो सबको जीने का तारिका सिखाया करती थी।
ना जाने क्यों इतनी उदास हो तुम,
देखो, समझो सबकी बहुत खास हो तुम,
शायद कुछ खोया है तुमने,
पर तुम्हें क्या पता कितनों की तलाश हो तुम।
माना कोई रूठ गया है तुमसे पर कोई बात नहीं,
हाँ कुछ मन चाहता नहीं हुआ है तुम्हारे साथ पर कोई बात नहीं,
सिर्फ कोषिश और मिन्नत करना ही हमारे हाथ में है,
आगर फिर भी कुछ ना हुआ तो कोई बात नहीं।
बस एक बार मस्कुरा दो तुम,
एक बार फिर से पहले की तरह जिंदगी जी कर दिखा दो तुम,
तुम्हारी एक हंसी पर न जाने कितनो के दिल की धड़कने अटकी हैं,
बस एक बार खुल कर, खिलखिला कर बस हस दो तुम।
By Karan Bardia

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