" तुम चन्दन हो "
- Hashtag Kalakar
- May 21, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 2, 2024
By Sandeep Singh
मैं कुछ नहीं और मैं खुश नहीं
मैं ग़म सा , आंसू नम सा
और कि सी टूटे आशि क़ के मन सा ....
तुम चन्दन हो , तुम चन्दन हो
कि सी के मा थे पे, कि सी के गले पे
और मैं काँ टों सा , अक्सर लो गो के पैरो के तले पे.....
के तुमसे मो हबत है के नहीं , नहीं जा नता
तुमसे मो हबत है के नहीं , नहीं जा नता
पर कुछ अरमा न तो है खि ले से
जब से हो तुम मि ले से....
एक मुदत से मर चुके थे मेरे जज़्बा त
के एक मुदत से मर चुके थे मेरे जज़्बा त
साँ स लेने लगे है, जब से हो तुम मि ले से....
बस इसी बा त को तो नहीं समझते तुम
बस इसी बा त को तो नहीं समझते तुम
बस इसी बा त के है, तुम से गि ल्ले से
तुम कि सी के मा थे पे, कि सी के गले पे
और मैं काँ टों सा , अक्सर लो गो के पैरो के तले पे....
By Sandeep Singh

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