तुम अब धड़कते क्यों नहीं
By Rathod Aakash
तुम अब धड़कते क्यों नहीं
चल माना कि वो गैर निकला.....
हम ही फितरत बदलते क्यों नहीं!
थोड़ा सब्र और कर लेते हैं उनका,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
ख्वाब तो सारे तुमनें बुने थे.....
तो ख्वाब तुम्हारे निखरते क्यों नहीं!
उस ज़ख़्म से लगता है उभरे नहीं हो,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
उसे जल्दी थी शायद! तो तोड़ गयी तुझे,
ये इतनी सी बात तुम समझते क्यों नहीं?
समझ जाओ.. और काम जारी रखो अपना,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
जिन तारों को जोड़ नाम लिख लेता था तू,
वो तारे कहाँ गायब है.. चमकते क्यों नहीं!
क्यों काली रातों को खुद में समेटे हुए है...
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
कैसी ये बेरुखी, क्यों छाई है खामोशी !
उन यादों की खुशबू से अब महकते क्यों नहीं,
अपनी कर ली है तो मेरी सुनते क्यों नहीं,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
हुआ क्या है तुझको ? बता दे तू जरा,
यूँ बेधड़क मचल कर मुझे ना दे तू सजा,
सब बातें जान कर भी कुछ कहते क्यों नहीं,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
देख कर भी मंजर यूँ क्यों खड़ा है तू,
बेवजह उसे पाने की जिद पर अड़ा है तू!
वो किसी और के इश्क़ में घायल है....
तो सब जान कर भी तुम संभलते क्यों नहीं,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
अब तो सब शान्त ही है ना दरमियां.....
उसकी बातें वो किस्से चहकते क्यों नहीं!
वो मशरूफ है तो किसी और से दिल्लगी में,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
वो तोड़ देती है जब तेरी हर आस.....
वो तेरी एक तलब को समझते क्यों नहीं!
कल से यूँ जुड़े है वो काल की तरह तो,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
ये शायर भी तो जल रहा है उसे पाने को,
उसे पाने की हठ है वो परखते क्यों नहीं!
इस सोच में शायद तू भी फंसा है अब,
दिल..! तुम अब धड़कते क्यों नहीं?
By Rathod Aakash

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