तारों की बातें
By Apurva Banthia
मच्छरदानी के बीच से
टिमटिमाते तारों की रौशनी टपकती है
तारे तो रात भर बतियाते हैं…
नानी कभी बीच कहानी ही झपकती है…
कभी सप्तऋषि बोलते हैं
कभी शेर गुर्राता है…
चमकती मीन की आँखें
सिरहाने से क्षितिज तक सरकती हैं…
तारे तो रात भर बतियाते हैं…
नानी कभी बीच कहानी ही झपकती है…
कई साल हो गए गच्ची पे सोये,
मच्छरदानी न जाने कहाँ गयी…
तारों में बहुत ढूँढा, कोई न मिला…
न भेड, न भालू, न छिपता शिकारी…
आज कल वे रात भर नहीं बतियाते…
पर सोचता हूँ, वहीँ तारों के बीच…
नानी कभी कभी
बीच बीच में ज़रूर हिचकती है।
By Apurva Banthia

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