तववकुल
By Amit Kumar
तेरी नज़र में तव्वकुल पर चलना खुदा का फरमान है
अब तो तव्वकुल तेरी ज़िद है, तेरी इबादत है
पर मेरी भी बात सुन
शायद आज कल तो, खुदा भी बेईमान है
तव्वकुल पर चलना उनके लिए है जो अपने आप से अंजान है
तव्वकुल बदल अपनी हसरतों से
क्या पता खुदा का यही अरमान है
तव्वकुल को पथर की लकीर समझना
ज़िंदगी का अपमान है, ये तो बेबसी की ज़बान है
सुन खुदा तुमने ज़िंदगी दी, साँसे दी
पर अगर तव्वकुल ही तेरी मांग है
फिर तो यही ज़िंदगी, साँसे, अपनी हसरतों के लिए क़ुर्बान है
By Amit Kumar

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