तलाश में भी अगर मेरी
By Usaid Shaikh
तलाश में भी अगर मेरी; कारवां हो मेरा नहीं हूं मैं, के बजुज़ मेरे कुछ निशां हो मेरा था एक गीत के लफ्ज़ों में खो गया मुझ से है एक ख्वाब; के ताबीर ही बयां हो मेरा
ये बाज़्गश्त भरी मह्फिलों की चीज़ नहीं वो खंडरों से भी निकले जो हम ज़बां हो मेरा मुझे अज़ीज़ है; सब फल्सफों से दुन्याँ के वो फ़िर यक़ीन हो मेरा; के फ़िर गुमां हो मेरा यूं आईने को सवारा के खुद को भूल गया वो अक्स खो गया मुझ से; जो तर्जुमां हो मेरा बजुज़ _ सिवाये ताबीर _ ख्वाब का अर्थ/ परिणाम बयां _ व्याख्या गुमां _ कल्पना तर्जुमां_ अनुवादक
By Usaid Shaikh

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