तलाश-ए-इंतज़ार
Updated: Jul 17, 2025
By Tanya Singh
हर रास्तों पर आँखें बिछाई मैंने,
हर गलीयों में साँसें लुटाई मैंने…
सोचा, कभी तो मिलोगे तुम,
कहीं तो मिलोगे तुम…
कभी तो आवाज़ दोगे तुम,
शायद अपना कहोगे तुम…
बैठी रही इस इंतजार में,
हक़ तो जताओगे तुम….
अगर इस जनम में नहीं सही,
पर अगले जनम तो आओगे तुम…
By Tanya Singh

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