तर्जन
By Nitin Kumar
जब तक धरा पे हूं पड़ा
कर रक्त से श्रृंगार मेरा
इस से पहले उठ पड़ूं
कर डाल दे संहार मेरा
क्षण भर का भी न विलंब हो
यूं ही समय न व्यर्थ कर
दे यातनाएं मुझको तू
हो जिसमें भी तू समर्थ कर
यदि प्राण मेरे बच गए फिर
तू न जीवित रह सकेगा
होगा तुझ पर वार ऐसा
तू जिसे न सह सकेगा
कंधे पे तेरे चढ़ पड़ूंगा
शीश तेरा उखाड़ दूंगा
चीरकर छाती तेरी
टुकड़ों में तुझको फाड़ दूंगा
By Nitin Kumar

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