तमाशे वाला (Tamashewala)
By Sameer Agarwal
वो तमाशे दिखाता रहा,हम तमाशा बनते रहे,
वो ख्वाहिशे जगाता रहा हमारे ख्वाब जलते रहे ।
वो सबको हंसा-हंसा कर अपनी रोजी कमा रहा था,
मुझ अकेले के आंसू जाने क्यूं उसको खलते रहे।
तो चलने लगा मैं हटके, तमाशाबीनों की भीड़ से ,
कानों से उसके बोल फिर भी दिल में उतरते रहे ।
मुड़कर देखा तमाशेवाला सबको जीना सिखा रहा था,
हम जिंदगी से हारे थे,बस यूंही चलते रहे, यूंही चलते रहे ।
By Sameer Agarwal

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