तन्हाईयां
Updated: Oct 2, 2024
By Anu - AnmolChahat
जब तनहाईयों के भंवर में हम डूब जाते हैं,
जब किसी के चले जाने से हम टूट जाते हैं,
तब ये चार दिवारियां हमको,घूरने लगती है,
जाने कितने उल्टे सीधे हमसे सवाल करती है,
घायल हृदय को और लहूलुहान करती है,
यादों को कुरेद कर दर्द से बुरा हाल करती है,
तब दुनियां से क्या हम खुद से भी रूठ जाते हैं,
जब किसी के चले जाने से हम टूट जाते हैं।
ख्वाबों के हर धागे को तार तार करती है,
उम्मीदों की चादर से भी बेजार करती है,
अपने नाखूनों से हम पर वार करती है,
दुश्मन से भी ज्यादा बुरा व्यवहार करती है,
तब दिल के छाले दिल के भीतर फूट जाते हैं,
जब किसी के चले जाने से हम टूट जाते हैं।
By Anu - AnmolChahat

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