तन्हाई के इस सफ़र में
By Amarjit Kaur
तन्हाई के इस सफ़र में तन्हा हम नहीं,
संग तुम जो हो हमारे हर सू, हर कहीं।
दिल की हर धड़कन में मेरे एहसास तुम्हारा है,
शब-ओ-रोज़ दिल को इसका ही अब सहारा है।
तन्हाई के इस सफ़र में तन्हा हम नहीं,
संग तुम जो हो हमारे हर सू, हर कहीं।
ख्वाबों में दीदार का इंतज़ार हम करें,
उन सुनहरी सपनों को आँखों में भरें।
तन्हाई के इस सफ़र में तन्हा हम नहीं,
संग तुम जो हो हमारे हर सू, हर कहीं।
ए ज़िंदगी! इस ज़िंदगी से फिराक कब हो तुम,
साया बन के साथ मेरे चल रहे हो तुम।
तन्हाई के इस सफ़र में तन्हा हम नहीं,
संग तुम जो हो हमारे हर सू, हर कहीं।
By Amarjit Kaur

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