तकदीर
By Vishvadeep Jain
खून से लिखी है तकदीर हमारी ,
या किसी तलवार से ,
कहने को तो खुश रहते है ,
पर अंदर से दुश्वार है ,
बहुत सुनाई जाती है ,
शौर्य की कहानियां ,
क्यों फिर लिख दी तकदीर मै ,
मूर्खताओं की भावना ,
अब नहीं समझ आ रहा जीवन ,
कदम कुछ उठाना है ,
आप बताओगे है भगवन,
या आपके समीप आना है ,
रास्ता दिखाओ अब मुझे ,
मै भटक राह से गया हूं ,
अब या तो आप बचे हो ,
या फिर मेरा जीवन ,
मुझे कुछ पता नहीं ,
न ही समझ सही गलत की ,
मुझे लगा था सही मै ,
पर हु गलत मै सभी के लिए ,
सही मुझे अब बनना हैं ,
खुशियों को मुझे अब पाना है ,
देख लिए दुख जीवन मै ,
अब सुख को ज़रा सा पाना हैं ,
चीन ना लेना कुछ पल मै ,
बस अब यही विनती है ,
खुशी देना तो लंबी देना ,
वरना दुख से ही काम चला लेंगे ,
ढले हैं अब तक जिसके संघ ,
हम आगे भी काम उससे चला लेंगे ,
अब बस थोड़ा रुकना है ,
मुश्किलों को कम करना है ,
जीवन के इस मोड को ,
ज़रा चपलता से जीना है ,
रुकने का नाम नहीं लूंगा ,
पर थोड़ा ज़रा ठहरना है ,
खुद के खातिर अब ज़रा ,
गली में कही रुकना है ,
मंजिल ढूंढ रहा हु अब भी ,
रुकने की जहां इच्छा हो ,
आप ही मार्ग दिखाओ भगवन,
जहां आपकी प्रभु इच्छा हो ,
रुकने का मन बस ,
अब थोड़ा सा विश्राम लेना है ,
तकदीर लिखी है अगर तलवार से ,
तो थोड़ा परिक्रम भी करना है ,
बस वही परिक्रम के लिए,
ज़रा मुझे अब रुकना है ,
अपनी तकदीर को बदलने खातिर ,
बस काम ऐसा कुछ करना है ,
बस अब तकदीर बदलना है ।।
By Vishvadeep Jain

Very true words 👍
Words can be stronger than swords, when in the right hands. And this is clearly that❤️
Trueee..✨👈🏻
Beautifully potrayed.👏
♥️