ढूंढता हूँ
By Vikas Rajoriya
सहर का हर विकल्प सहारा ढूंढता हूँ, हा मै बस अब तुझे ढूंढता हूँ !
जो राते कट गयी है इंतज़ार में तेरे, हा मै उसमे अब तेरे निशाँ ढूंढता हूँ !!
रेत के समंदर में पानी के जहाज ढूंढता हूँ, हा मै आज भी मजनूं के सुराग ढूंढता हूँ !
वक़्त की कश्तियो में खामोशियों से पतवार ढूंढता हूँ , हा हा मै उसमे अब तेरे निशाँ ढूंढता हूँ !!
सहर का हर राजदार ढूंढता हूँ, हा मै अब उसमे बस तुझे ढूंढता हूँ !
जो राते कट गयी है इंतज़ार में तेरे, हा मै उसमे अब तेरे निशाँ ढूंढता हूँ !!
रेत के समंदर में पानी के जहाज ढूंढता हूँ, हा मै आज भी मजनूं के सुराग ढूंढता हूँ !
वक़्त की कश्तियों में खामोशियों से पतवार ढूंढता हूँ , हा हा मै अब भी उसमे अब तेरे निशाँ ढूंढता हूँ !!
By Vikas Rajoriya

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