ढूंढ लेना तुम मुझे
By Meeta Rani Behera
ढूँढ लेना मुझे तुम
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी.....
जब प्राची में लालिमा छा जाए,
मैं धरती पर पहली किरण बन उतरूँगी
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी......
जब उपवन में सुंदर सुमन मुस्कुराए,
मैं उसकी मुस्कुराहट में खिलूंगी
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी.....
जब बारिश की पह ली फुहार आए,
मैं उसकी रिमझिम बूँदें बन धरती पर बरसूंगी
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी
ढूँढ लेना मुझे तुम
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी……
जब सर्द रात की सुबह
घास पर नर्म ओस की बूँदें दिख जाएं,
तो ठहर जाना पलभर वहीं,
मैं उन बूँदों में चमकूंगी
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी......
जब पतझड़ के बाद
बसंत बहार आए
मैं कण-कण में महकूंगी....
ढूँढ लेना मुझे तुम
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी.....
मैं, नदी की कल-कल धारा में बहूँगी,
प्रक्रति के हर रूप, रंग, हर भाव में
संग तुम्हारे साथ चलूँगी....
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी ....
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी ....
By Meeta Rani Behera

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