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डूबता सूरज

Updated: Feb 2, 2024

By Swati Sharma 'Bhumika'


“भूमिका” अपने माता-पिता के साथ अपने दादा-दादी से मिलने

उनके गाँव गई | वह बहुत खुश थी, क्योंकि उसके दादा-दादी उसे ढेर

सारी कहानियाँ सुनाने वाले थे | भूमिका को कहानियाँ सुनना बहुत

पसंद था | वह जब भी अपने दादा-दादी या नाना-नानी के घर जाती,

उनसे तरह-तरह कि कहानियाँ सुनती एवं घर आकर अपने मित्रों को भी

सुनाती |


दादाजी एक छोटा-सा थैला उनके कंधे पर टांगे कहीं जा रहे थे |

परन्तु, भूमिका की अवाज़ सुनकर रुक गए | भूमिका ने अपने माता-

पिता के साथ अपने दादा-दादी के चरण-स्पर्श किये और उनका

आशीर्वाद लिया एवं उनके साथ चलने का आग्रह किया | दादाजी उसे

उनके साथ, उनके खेत में ले गए |


भूमिका को हरे-भरे खेत बड़े प्यारे लगते थे | वह जब भी गाँव

आती, अपने दादाजी के साथ अक्सर वहां जाती | खेत पर पहुंचकर

दादाजी और भूमिका ने ढेर सारी बातें की | जब शाम हुई तो भूमिका ने

दादाजी से घर चलने को कहा | दादाजी सूरज की ओर देखते हुए

मुस्कुरा रहे थे एवं किसी सोच में डूबे हुए थे |


भूमिका ने बड़े प्यार से उनसे पूछा- “दादाजी, आप डूबते हुए

सूरज को देखकर इतना क्यों मुस्कुरा रहे हें ? इतने में भूमिका के

पिताजी भी वहां पर आ चुके थे | अतः भूमिका की बात सुनकर उन्होंने

भी यही प्रश्न किया, बोले- “भूमिका ठीक कह रही है बाऊजी, डूबता

सूरज तो असफलता का प्रतीक होता है ना ?”



दादाजी ने अपने पुत्र एवं पौत्री की ओर देखा एवं मुस्कुराकर

बोले- “हाँ बेटा, तुमने एकदम सही कहा | परन्तु, क्या तुमने कभी यह

सोचा है कि डूबता सूरज उगते हुए सूरज की तुलना में और भी अधिक

सुंदर क्यों दिखाई देता है ?” भूमिका के पिताजी बोले- “आप ही बतायें

पिताजी मैं इसके पीछे छुपे कारण को जानने हेतु बहुत उत्सुक हूँ |”


दादाजी ने पुनः सूरज की ओर मुख किया और कहा- “जब सूरज

उगता है, वह अपने कार्य को करने हेतु बहुत तत्पर होता है | सूरज का

कार्य है जन-जीवन को ऊर्जा एवं प्रकाश प्रदान करना | जब दिनभर वह

अपने कर्म सफलतापूर्वक संपन्न कर देता है, तब जाते-जाते वह अत्यधिक

सूकून में होता है | यही सूकून एवं शीतलता से परिपूर्ण शांति उसे और

भी अधिक सुंदर बना देती है | हाँ, यह सत्य है कि उगते हुए सूरज की

तुलना में डूबते हुए सूरज में चमक कम हो जाती है | परन्तु, उसका

सफलतापूर्वक किया हुआ कृत्य उसे चमकहीन होने के पश्चात् भी

सुन्दरता प्रदान करता है | इस प्रक्रिया से हमें यह शिक्षा मिलती है कि

नित्य सुबह उठकर अपना कर्म सच्ची लगन के साथ संपन्न करना चाहिए

| क्योंकि उससे मिला हुआ संतोष हमें और भी अधिक सुंदर बना देता है|”


दादाजी से मिले ज्ञान से प्रेरणा लेकर दोनों पिता-पुत्री ने उनके

साथ घर की ओर प्रस्थान किया |


By Swati Sharma 'Bhumika'




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