डरता था मोहब्बत से
By Rathod Aakash
डरता था मोहब्बत से
डरता था मैं मोहब्बत से
कहीं बर्बाद न हो जाऊं
पर जबसे जाना है तुमको
लगता है शायद आबाद मैं हो जाऊं
ना मैं ठहरा राम
जो तेरी मोहब्बत में सेतु में बनाऊं पर
याद करे मेरे नाम से तुझको
शायद मोहब्बत में कुछ ऐसा कर जाऊं प्यार का तो पता नहीं
पर तुम नज़र-अंदाज़ न करो तो काफी है
यूं तो है हर ख़ुशी इस जहां की मेरे पास
बस तेरा ही आना बाकी है
याद है मुझे वो पहला दिन
जब पहली दफा तुम्हे देखा था
1st लाइन की 2nd bench पर तुम
और 3rd लाइन की 3rd bench पर मैं बैठा था
ना जाने क्यों धड़क उठा
जो दिल बरसों से चुप बैठा था
कुछ नही रखा इस प्यार मोहब्बत में
मैं यही सबको कहता था
देखकर तेरा भोलापन ....
धड़कता दिल भी थम गया
इन होठों की मुस्कराहट के लिए मैं
भरी CLASS में जोकर बन गया
अँधेरे में डूबे इस मन को
निकालने की खातिर तेरा मुस्कुराना ही काफी है
यूं तो है हर ख़ुशी इस जहां की मेरे पास
बस तेरा ही आना बाकी है
बयां नहीं कर सकता हाल-ए-दिल........
इसलिए शब्दों में पिरोकर लिख रहा हूँ
आता नहीं मोहब्बत बयां करना मुझे
अब यह गुण भी दोस्तों से सीख रहा हूँ
करना है PROPOSE तुम्हे ...(जो मुझसे नहीं होगा )
यही कोशिश अब शीशे के आगे कर रहा हूँ
कहीं मोहब्बत के चक्कर में
झापड ना खालूं 🤪🤣
इसलिए तो अभी डरता हूँ
हाँ ना का तो पता नहीं ......
बस तू महज़ ये सुनले तो काफ़ी है
यूं तो है हर ख़ुशी इस जहां की मेरे पास
बस तेरा ही आना बाकी है
By Rathod Aakash

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