टूटा है
By Keyur Joshi
टूटा है आज यक़ीन, तो यक़ीन करना छोड़ दें क्या,
दिल रोज़ टूटता है, तो इश्क़ करना छोड़ दें क्या...
यूँ तो शाद है आजकल ज़िंदगी में,
अब कोई ग़म नही तो मयखाने जाना छोड़ दें क्या...
मुकर्रर कहाँ कहता है वो हमारे हर एक अशआर पर,
अब वो नही कहता तो कलाम पढ़ना छोड़ दें क्या...
माना के कुछ सांसें अटकी है आज भी उसीमें,
कुछ साँसों के लिए जीना छोड़ दें क्या...
शक ना कर हमारी वतन परस्ती पर कभी,
एक मोहब्बत गांव रुकी है, कहो तो छोड़ दें क्या...
एक अरसे से ख़्वाब क़ैद है सीने में,
इजाज़त हो तो उन्हें खुला छोड़ दें क्या...
घर तबाह यहां भी है, ज़िंदगी फना वहां भी है,
इतनी सी बात पे कहो जंग करना छोड़ दें क्या...
रूह रंग रंग है दिल बाग बाग,
खुशहाली है गुलों में, हम बागबानी छोड़ दें क्या...
By Keyur Joshi

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