टॉक्सिक मदर
By Kavita Chavda
रात के 2 बजे है और नींद नहीं आ रही। आज की साइकोलॉजी क्लास बोहोत खराब थी। भला ऐसा भी कहीं होता है की मां अपने बच्चे के साथ कुछ गलत करें। सोच रहा हूं कहीं गलती तो नहीं करदी ये सब्जेक्ट लेके।
अगले दिन रिचा से कैंटीन में मुलाकात हुई। उसने पूछा आज क्लास क्यों नहीं आया। मैंने कहां अरे जो टॉपिक चल रहा है क्लास में वो मुझे समझ नहीं आ रहा। कैसे कैसे किस्से है जहां मां ने अपने ही बच्चों का बुरा चाहा हो। ऐसा भी कहीं होता है क्या। उसने कहां क्यों नहीं हो सकता, हम जो पढ़ रहे है वो सब वास्तविक केस स्टडी ही तो है। मैंने कहां वो जो भी हो, मुझे टॉक्सिक मदर का कॉन्सेप्ट नहीं समझ आता।
अगले दिन भी में क्लास बंक करने वाला था। मैंने फैसला कर लिया था, नया टॉपिक शुरू हो तब ही जाना शुरू करूंगा। में कैंटीन में रिचा का इंतजार करता रहा पर वो दिखी नहीं। उसका फोन भी बंद आ रहा था। सोचा अपने पीजी जाते हुए उसके फ्लेट भी हो आऊंगा, शायद आज कॉलेज आई ही न हो।
उसके फ्लेट जाकर पता चला की वो चलते लेक्चर से उठ के ही आ गई थी। उसकी आंखे सूजी हुई थी जैसे वो बोहोत रोई हो। उससे पूछा तो बोली आज का लेक्चर अच्छा नहीं था। मैंने हस्ते हुए कहां, देखा मैंने पहले ही कहां था ये टॉपिक ही बेकार है।
कुछ देर चुप्पी के बाद वो बोली, तुम लड़के हो न इसलिए शायद तुम्हें टॉक्सिक मदर का कॉन्सेप्ट नहीं समझ आ रहा क्योंकि मां हमेशा अपने बेटे से ज्यादा प्यार करती है। मैंने बचपन से मां का वो प्यार हासिल करने की कोशिश की है। अच्छी पढ़ाई करना, उनके उसूलों पर चलना और हमेशा कोशिश करते रहना की ऐसा क्या करूँ जो मुझे उनका वो प्यार हासिल हो। ऐसा नहीं की मुझे वो प्यार ही नहीं करती पर मेरे हिस्से उनका रूखापन, जलन और दर्द प्यार से कई ज़्यादा आया है। आज के लेक्चर में ऐसी ही एक केस स्टडी की बात हुई और मुझे ट्रिगर हो गया।
मैंने कभी ये नज़रिए से सोचा ही नहीं मां के बारे में पर रिचा के चेहरे पर वो उदासी और उसकी बातों में इतना दर्द पहली बार देखा। मैंने ठान लिया आज पीजी जाके टॉक्सिक मदर की सारी केस स्टडी की पढ़ाई करूंगा।
By Kavita Chavda

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