झोंका… पवन का
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
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By Jyoti Prakash Mohanty
अभी अभी जो गुजरा यहाँ से
एक पवन का झोंका था शायद
बेबाक़ इतना चंचल चला वो
कुछ क्षण तेरे संग रुका था शायद !
आँचल में तेरे भँवर बना के
बिखरी ज़ुल्फ़ों के लहरें उड़ा के
नंगी पीठ पर उँगली फिरा के
कमर के नीचे थपकी लगा के
तेरे शरीर के कण कण छू के
यूँ ही मचलता चला था शायद !
पर..बाहों में मेरी आया नहीं वो
बन के महक छाया नहीं वो
मोड़ पे रुक के मुड़ा नहीं वो
तेरी तरह कुछ ख़फ़ा था शायद…!
By Jyoti Prakash Mohanty

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