जो चाहते हो
By Pallavi Vahi
जो चाहते हो
वो ज़रूरी तो नहीं की मिल जाए
यह दुनिया का दस्तूर है
ज़िन्दगी में कमीं होना
यह दुनिया का दस्तूर है
हर इच्छा का पूरा न होना
ये कमियां ना हों
ये इच्छाएं ना हों मे
तो ज़िन्दगी में जीने के लिए
रखा क्या है
मिल गए तो भूल जाना आसान है
ना मिले तो भुलाना आसान नहीं
यह दुनिया का दस्तूर है
जो चाहते हो
वो ज़रूरी तो नहीं की मिल जाए
यह सोच कर आगे चलो
की मिलना मुश्किल ही नहीं
पर नमुमकिन है
मैंने प्यार किया
पर जिस जिस ने मुझ से प्यार किया
मुझे हक़ नहीं है
दिल उनका दुखाने का
ज़िन्दगी ने पहले मिलाया होता
तो बात ही क्या थी
अब यह दिन न देखना पड़ता
अब यह तड़प न होती
अब शान्ति होती
मन में और ज़िन्दगी में
पर
जो चाहते हो
वो ज़रूरी तो नहीं की मिल जाए
मुझसे अब कुछ नहीं मिल पायेगा तुम्हे
यह ज़िन्दगी जीने के लिए
सोचो तो चाहिए कुछ भी नहीं
और चाहिए बहुत कुछ
यह तो नजरिया है अपना अपना
मुझसे तो प्यार की आशा कर सकते थे
अब वह भी मुश्किल लग रहा है
ज़िन्दगी के थपेड़ों में मैं फस गया हूँ
चाहता हूँ तुम्हे
पर
जो चाहते हो
वो ज़रूरी तो नहीं की मिल जाए
फिर भी सोचता हूँ
चाहिए था प्यार इतना
की खाना छोड़ दूँ
जी सकता हूँ प्यार के
नाश्ता लंच और डिनर पर
इतनी कमी है मेरे अंदर
पुराने करम किये होंगे ऐसे
की इस जनम में प्यार न दे पाया कोई
और यह सोच सोच कर ही आधी ज़िन्दगी निकल गयी
पर
जो चाहते हो
वो ज़रूरी तो नहीं की मिल जाए
चलते चलते देखो मिलते हैं रस्ते
क्या पता ज़िन्दगी के किस मोड़ पर
मिलना हो फिर से
और तब इतना मुश्किल न लगे
साथ साथ दुनिया में चलना
तो चलते चलते आगे बढ़ें
अपनी ज़िन्दगी को आगे बढ़ाएं
चाहत होगी तो रास्ता बनेगा
एक बंधन ऐसा
एक रिश्ता ऐसा
जो भगवान् को मंज़ूर होगा
जो दुनिया को मंज़ूर होगा
और तब
जो चाहते हैं
वो मिल जायेगा
By Pallavi Vahi

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