जैसे तू मुझे देखती है इन निगाहों से
Updated: Jul 19, 2025
By Shriram Bharti

जैसे तू मुझे देखती है इन निगाहों से
तेरे मन में इक शरारत होनी चाहिए
चलें हैं मुकदमे मेरे दिल के तेरे लिए
तेरे दिल की भी सियासत होनी चाहिए
भूलने लगा हूं मैं रस्ता तेरे घर का
तेरे घर की ओर इमारत होनी चाहिए
बिना पूछे जो छू लूं तो इश्क समझना इसे
थोड़ी ही सही मगर इक इजाज़त होनी चाहिए
जो पूछ लूं तुमसे मैं मोहब्बत की परिभाषा
मैथिली व बघेली में इक कहावत होनी चाहिए
मुझपे बरसे जो दिनों-दिन साल भर
मेरे प्रति उसकी ये इनायत होनी चाहिए
डर घबरा कर ही रह गया, मन में ही चिंता लिये
मुझसे दूर ही सही मगर वो सही सलामत होनी चाहिए।
By Shriram Bharti

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