जीवन एक युद्ध है।
By Budhraj Singh Khinchi
अपने प्रारब्ध और कर्मों के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
स्वयं में व्याप्त बुराई और भलाई के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
अपने स्वार्थ और परमार्थ के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
दुनिया के प्रलोभनों और सिद्धान्तों के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
सहूलियतों और संघर्षों के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
अहंकार तुष्टि और प्रेम के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
मन के विचलन और स्थितप्रज्ञता के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
व्यापार और प्यार के बीच।
जीवन एक युद्ध है,
दुनिया की सारी चालाकियों और मासूमियत के बीच।
और मैं इस युद्ध में कटिबद्ध हूँ।
मैं किसी भी कीमत पर हारने नहीं दूँगा।
अपने कर्मों को अपने प्रारब्ध से।
अपनी भलाई को अपनी बुराई से।
परमार्थ को अपने स्वार्थ से।
अपने सिद्धान्तों को दुनिया के सारे प्रलोभनों से।
संघर्षों को सहूलियतों से।
प्रेम को अहंकार तुष्टि से।
स्थितप्रज्ञता को मन के विचलन से।
प्यार को व्यापार से।
अपनी मासूमियत को
दुनिया की सारी चालाकियों से।
मैं पूरी तरह दृढ़ हूँ
हर हाल में इन्हें जीता कर रहूँगा।
क्योंकि इस महाभारत का अर्जुन भी मैं हूँ।
मैं ही योद्धा, मैं ही भोक्ता, मैं ही कर्ता हूँ।
क्योंकि इस महाभारत का कृष्ण भी मैं हूँ।
मैं ही साक्षी, मैं ही दृष्टा, मैं ही अकर्ता हूँ।
By Budhraj Singh Khinchi

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