जीवन एक नौका विहार हैं!
By Monika Jayesh Shah
जीवन एक नौका विहार हैं!
और हम उस पर सवार हैं!
जो जीवन नौका चलाता हैं;.
उसी पर जीवन हमारा संघर्ष सार हैं!
ज़िंदगी के सुख दुःख की तरह हमारा
नौका का भी उथल–पुथल भार हैं!
डगमग जगमग करती हमारी पतवार
हिलोरे खाती हैं जीवन में हर बार..
उसी में हैं हमारा सारा सुख सार;
किस्मत से जब किसी को
सब कुछ मिल जाता हैं तो
सब कहते किस्मत अच्छी हैं!
कर्म बनाने के लिए भी
अच्छे कर्म करना पढ़ता हैं!
फ़ल हमें अपनी जिंदगी दे ही देती हैं!
फिर वो खट्टा हो या मीठा;
बस मन में कड़वाहट ना आने देना!
किस्मत के खेल निराले हैं!
जिसके जीवन में आये
उसके उजाले ही उजाले हैं!
ये हमारे जीवन की सच्चाई
लोग आते हैं..चले जाते है!
जो आते है उन्हें लोटकर जाना हैं!
जो दुनिया से जाते है उन्हें भी
फिर से लोटकर इसी दुनिया में आना है!
जीवन एक मकड़ी का जाल हैं;
उसमें फसना जी का जंजाल है!
आदमी उसमें फसता चला जाता है!
रिश्तों में महकता चला जाता हैं!
हर एक से संबंध बनाकर.. वो
सब रिश्ते नातो को छोड़ जाता हैं!
यहीं जीवन जीने प्रकिया हैं!
जो खाली हाथ आया हैं!
वो खाली हाथ ही जायेगा!
यहीं जीवन की सच्चाई हैं!
प्रकिया और सच्चाई को समझ लो;
आत्मा का मिलन परमात्मा से हैं!
इसका महत्व तुम सब समझ लो!
और अपना जीवन सुखमय
भगवान के चरणों में अर्पण कर दो!
By Monika Jayesh Shah

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