“जीवन एक कर्मपथ”
By Prasad Madhukar Shembekar
सामर्थ्य की कसोटी पर सोने सी चिंगार है
धारण करके इसिको बनना तुम्हे महान है ।।१।।
जब दिल चाहे उड़ जाना इस माया के जनजाल से
सोचना तुम्हे है, की जाना कब बाहर है ? ।।२।।
सोच सोच कर दिन बिताया फिर भी कुछ भी समझ नही आया
कितना सोचेगा कितना करेगा यह तो है ईश्वर की माया ।।३।।
माया का परहेज करके कर्म से जोड़ी तु बंधा ले
खुदको इस माया से तू बंधन-मुक्त करवाले ।।४।।
ये मत सोच तू कर्म का फल क्या होगा रे इंसान
जो तेरा अच्छा कर्म होगा उसी लेकर चलता जा
बिना सोच के ये इंसान ।।५।।
माया की सीढ़ी पर मनुष यूंही चलता जाता है
काम, लोभ, मोह, मत्सर से खुदको वो तड़पाता है ।।६।।
बिना काम का बोझ उठाकर जीवन में क्या कर लोगे
जीवन है सुख-शांति की चाबी उसको बेफिजुल में खो दोगे ।।७।।
जीलो इसको जी भर कर खुशियों से चमकालो मन
बेफिजूल की चिंताओं में व्यर्थ ना कर तु अपना जीवन ।।८।।
सोच बोझ है चिंता डाकिन इसके झांचे में न आना तु
बस कर्म का हाथ पकड़कर यूंही चलते जाना तू ।।९।।
निश्चित पहुंचेगा एक दिन तु मंजिलों के पैगामो पर
सभी करेंगे प्रबल समर्थन तेरे सत्य विचारो पर ।।१०।।
कर्मो के सिद्धांतो से पीछे यू न हटना तू
बस कर्म करते चलना तू अब कर्म करते चलना तू ।।११।।
By Prasad Madhukar Shembekar

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