जीते –जीते जीना भी आ जाता है
By Abhishek Kumar
प्रत्येक पल जीवन का कुछ सिखलाता है ।
जीते –जीते जीना भी आ जाता है ॥
हर सफलता और विफलता से परे‚
एक पथ जीवन का जो निश्चित करे‚
कितनी भी बाधाएँ हो पर न डरे‚
अंततः गन्तव्य भी पा जाता है ।
जीते –जीते जीना भी आ जाता है ॥
संकुचित जिव्हा उचित व्यवहार हो‚
अविचल संकल्प का आधार हो‚
ज्ञान का, सामर्थ का विस्तार हो‚
तो स्वतः समृद्धि भी पा जाता है ।
जीते –जीते जीना भी आ जाता है ॥
By Abhishek Kumar

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