जी चाहता है…
By Himani Bhardwaj
आज ख़ुद से किया वादा तोड़ने को जी चाहता है
दरमियान है जो फासले वो मिटाने को जी चाहता है
छू लू तुजे इस तरह की आज रस्मो को तोड़ने का जी चाहता है
तुझसे अपनी साँसों की महक जोड़ने को जी चाहता है
जो होगा साथ वो कल आज जीने को जी चाहता है
तेरे पलकों के साये सपनो सा सोने को जी चाहता है
होंठों पे खिली मुस्कराहट सी सजने को जी चाहता है
आज तुझे खोने के डर को खोने का जी चाहता है
By Himani Bhardw

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