जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में...
By Arshi Srivastava
बदलते वक़्त के साथ बदल गए किरदार हमारे
गौर करने पे पाया बदले हैं सारे के सारे
थक चुके हैं हम आराम कमाने में
जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में…
अलादीन की जादुई दुनिया में खो कर
फिर से माँ की उसी गोदी में सो कर
क्या हरज है वक़्त से वक़्त चुराने में
जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में..
नानी की लोरियाँ, नाना की कहानियाँ
वो सारी शरारतें, नन्हीं नदानियाँ
जब हँसी आती थी डाँट भी खाने में
जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में..
पीठ पर चढ़कर घोड़े की सवारी
काँधे पर बैठी, देखो बिटिया दुलारी
वो सुकून कहाँ महँगी कार चलाने में
जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में...
सहेते हुए सारी यादें दिल के कमरे में
बड़ी ज़िम्मेदारियों के छोटे से घर में
राहत मिलती है थोड़ी ज़िंदगी सजाने में
जी करता है जाने को गुज़रे हुए ज़माने में...
By Arshi Srivastava

Beautiful