जिन्दगी एक दौड़
- Hashtag Kalakar
- Dec 20, 2024
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By Shakti Shukla
ज़िंदगी की इस दौड़ में
पल कुछ सिमट से गए हैं
वक़्त की स्याही में डूबे
ख़्वाब कुछ बिखर से गए हैं
कैसे बयां करूं
ख़ामोशियों में छुपे इस शोर को
जज़्बात मेरे अल्फ़ाज़ों में उलझ से गए हैं
By Shakti Shukla

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