जिंदगी के रूप
Updated: Jul 4, 2025
By Satya Deo Pathak
चलते हुए राहों पर,
जीवन के धूप छाव में,
क्या मिला, क्या ना मिला,
हसरतो को आस में?
कुछ रह गया अधूरा वक्त के इंतजार में।
कुछ रूठ गए बिन जाने समझे इस संसार में।
कुछ मन में ही दब के रह गई ,
इच्छाएं दुनियादारी के जंजाल में।
मन में रह गई गांठें, खुलने की आस में।
आज बीत गया,
अच्छे कल के इंतजार में।
शिकवे शिकायतें ,
ना मिट सकी अहम के वहम में।
मुंह मोड़ लिया,
दूसरो की बातों के संज्ञान में।
कुछ सोचो ,
क्या करें ? ऐसे हाल में।
शुरुआत खुद से ही करना होगा,
कुछ करना होगा मन को काबू,
कुछ छोड़ना होगा सूरत ए हाल में।
सब होगा अच्छा,
थोड़ा झुक लो, थोड़ा सह लो,
जी लो जीवन,
जीने दो औरों को भी ,
इस खूबसूरत संसार में।
By Satya Deo Pathak

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