जिंदगी का सफर
By Rathod Aakash
कुछ छोड़ गए साथ, कुछ ने पकड़ा हाथ,
मिलने बिछड़ने का हौंसला मिलता रहा,
बस ऐसे ही जिंदगी का सफ़र चलता रहा।
नाप तोल कर सब ने मोहब्बत की,
काम निकलने के बाद नफ़रत की,
ख़ुद की तारीफ़ न करी कभी,
दूसरों की प्रशंसा में कसीदे पढ़ता रहा,
बस ऐसे ही जिंदगी का सफ़र चलता रहा।
रख लिया स्वयं को अपने मन में ही,
बसा ली अपनी दुनिया अपने तन में ही,
तकलीफें बढ़ती रही फिर भी मैं हँसता रहा,
बस ऐसे ही जिंदगी का सफ़र चलता रहा।
सबक जीवन का पढ रहा हूँ,
अपने आप से ही इश्क कर रहा हुं
अच्छे वक़्त में पैर बढ़ा दिए आगे,
बुरे वक्त में किसी की नहीं सुनी बातें,
कड़वी यादों से दूर हो गया,
मैं गीत मुस्कुराहट के गाता रहा,
बस ऐसे ही ज़िंदगी का सफ़र चलता रहा।
By Rathod Aakash

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