जिंदगी और मेरा प्यार
By Neekhil Dedhia
महबूबा थी वो मेरी,मुझे छोड कर चली गई,
कुछ ही समय में वो मेरे आखों का नूर बन गई,
जाने से उसके ये जिंदगी अब अधूरी लग रही,
लगता है जैसा मेरी जुबां तो है,पर आवाज खो गई ।
आवारा सा भटक रहा था मैं,और किसी से नज़र यूंही मिल गई,
लगता है जैंसे मेरे ज़ख्म पर मरहम लागाने वाली मिल गई,
उसकी ख़ूबसूरती को कैसे मैं बयान करूँ,एक परी सी वो लग रही,
मिलने से उसको अब तो मेरे ख़्वाबों को भी आवाज़ मिल गयी ।
By Neekhil Dedhia

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