“जिंदगी”
By Prasad Madhukar Shembekar
क्यू रोता है हर पल हर दिन एक बार तो हस देना
देती है जिंदगी हर दिन मौका खुदको खुश तू रख तो जरा || १ ||
हर दिन फिर से नया सबेरा नई नई सी पहल तेरी
छूले तू इस आसमान को छोड़ कर सारे कुतर्क यही || २ ||
जीवन होगा स्वर्ग सा सुंदर जब तू कर्मो को श्रेष्ठ करेगा
बातो बातो में ना जब तू अपना समय व्यर्थ करेगा ||३||
अपने कर्मोंसे सीख तु देना अब ना करना बात यूंही
फीर कहेगी दुनिया तुझको तेरे कथनी करनी में भेद नहीं ||४||
By Prasad Madhukar Shembekar

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