जिंदगी
Updated: Dec 2, 2022
By Shivali Bhardwaj
कभी खुशी तो कभी गम
बस ऐसी है जिंदगी ,
किसी की खुशी में शामिल हो जाती हूं
तो किसी के गम में रो देती हूं,
अक्सर कभी कभी खामोशी को पड़ने की कोशिश करती हूं
तो कभी अपने अंदर के शोर को खामोश कर देती हूं ,
अकेले बैठ कर अपनी हर सांस को महसूस करती हूं
और अपने हर एहसास को एक पन्ने पे उतर देती हूं,
मेरी कलम कभी कभी मुझसे भी सवाल कर देती है
तुम अपने जज्बातों को यूं डायरी में क्यों बंद रखती हो
पर कलम क्या जाने की कुछ बातें सिर्फ लिखी हुई अच्छी लगती है,
मैं जिंदगी को बोहत रंगीन तरीको से जीती हूं
कभी चाय की चुस्की से मूड ठीक कर लेती हूं
तो कभी यारों में महफिल सजा लेती हूं
जिंदगी के रास्ते में बिछे कांटो की प्रवाह नही करती हूं
मैं लापरवाह हूं , बेपरवाह हूं , अपनी धुन में मस्त रहती हूं
अपनी मंजिल तक एक दिन पोंछा ही देगी जै जिंदगी
कभी खुशी कभी गम
बस ऐसी है जिंदगी!
By Shivali Bhardwaj

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