जारी रख
By Surabhi
अपनी कोशिशों का सिलसिला जारी रख
अपने धड़कन में उम्मीद बसाये रख
गिर गया तू,,,,,,तो भी कोई ग़म नहीं
गिर के भी उठने का हौसला जिन्दा रख
आंसू जो भर जाए आँखों में कभी
उनको पाल कर मोती बनाये रख
दिल भर जाये ग़मो से और तड़प हो सीने में
अपने जुनूं को दिल में जगाये रख
अपनी कोशिशों का सिलसिला जरी रख
अपने धड़कन में उम्मीद बसाये रख
लफ्ज़ो में नरमी आँखों में चिन्गारी रख
जीने के लिए तरकीबें बहुत सारी रख
मसलो का हल नही मिलता यूंही सोचते रहने से
तू अपनी तरफ से तलाश जारी रख
रास्तो में ठोकरे भी मिलेंगी तुझे
अपने दर्द के इलाज़ की भी तू तैयारी रख
अपनी कोशिशों का सिलसिला जरी रख
अपने धड़कन में उम्मीद बसाये रख
हार गया गर तू हालातों से कोई गम नहीं
जीतने का जज्बा दिल में तू जगाये रख
रौशनी न मिले कभी ग़िला न करना
तू खुद को जला कर जहां को रौशन रख
किसे ढूढ़ता है तू मंदिरों मस्जिदों में
खुदा को पा लेगा तू ग़र इंसानियत को बचाये रख
अपनी कोशिशों का सिलसिला जरी रख
अपने धड़कन में उम्मीद बसाये रख
तू क्यों हताश और टूटा हुआ है
अपने टुकड़ों को जोड़ वजूद को बनाये रख
ये जहां भी तुझे जान लेगा एक दिन
अपनेआप से तू मोहब्बात बनाये रख
सित़म कोई क्या कर पायेगा तुझपर
तू अपने अंदर की आग को जलाये रख
अपनी कोशिशों का सिलसिला जरी रख
अपने धड़कन में उम्मीद बसाये रख
आसरा किसी और का क्यों है तुझे
तू अपनी स्याही से तक़दीर खुद सजाये रख
आंधियां क्या डुबोयेगी कश्ती को तिरी
हाथों में अपने पतवार थामे रख
आसमां भी एक दिन झुकेगा तेरे आगे
ग़रदिश में भी चेहरे पे मुस्कान सजाये रख
By Surabhi

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