जाँ अगर
By Abhishek Choudhary
इश्क़ के हुस्न-ओ-सितम पर कर रही बारीकियां
जाँ अगर हो तो इजाजत आ करें नजदीकियां
दर्द-ए-दिल, पाना हैं मुश्किल तुमको अपनी हसरत में
हसरतों के दांव पर आओ करें तारीखियां।
यूँ नहीं हैं के तेरे दीदार का मारा हूँ मैं
ना तेरी आँखों की पाबंदी का बंजारा हूँ मैं
बस तेरी परछाई मेरी ज़िन्दगी रोशन करे
इस विरोधाभास के उन्माद का हारा हूँ मैं।
मायूसी जो हाथ मेरे तुमसे गर लग जाएगी
अश्क़ ना सिमटेंगे फिर तेरी ख़ता रह जाएगी
रोक ना पाएंगे खुद को साथ तेरा जो ना हो
यह नवाबी तेरे ग़म-ए-हिज़्र में बह जाएगी।
बस चले आओ मेरे ख़ाबी बने संसार में
यूँ ना बन बैठो जैसे बेदिल राजा दरबार में
फासले दरमियाँ हमारे मुझको यूँ झुलसा रहे
जैसे पिगला हो कहीं हीरे सा दिल अंगार में।
By Abhishek Choudhary

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