जरा संभलकर चला करो
Updated: Aug 2, 2025
By Rupam Ramesh Dange
जरा संभलकर चला करो,
रास्ते में उसका घर हैं, कही आहट ना आ जाए उसको,
जरा देखलो, खिड़की से ताक रही होगी, तुम्हारी राह निहार रही होगी,
वो जो उसके घर के पिंजरे के पंछी हैं ना बहोत हलचल कर रहे हैं,
कही उसको संदेसा तो नहीं दे रहे,
तुम्हारे साइकिल की घंटी भी न बजाना,
उसको आहट हो जायेगी, और अगर उसने देख लिया तो,
तो तुम्हारा फिर कत्ल होने से न बचा पाएगा कोई,
उसको पता हैं, कानों में बलिया और जरासी मुस्कुराहट मेरा कत्ल कर देगी…
By Rupam Ramesh Dange

Comments